सोमवार, 24 जनवरी 2011

जैसी जनता वैसा जनतंत्र ‼

मित्रों ,
  दायित्य से बचने के बहाने  बनाकर आप स्वयं अपनी जड़े  काट रहे है , आप के वक्तिगत हित-अहित से किसी को कोई मतलब नहीं परन्तु जब आपके चारित्रिक पतन से एक घर का ,एक घर से मोहल्ले का  ...आदि से होते हुए जब देश का पतन हो तो ये असहनीय है |
आप किसी से बस इतना भर कह दे की पोलीथीन का उपयोग न करे , स्वदेशी वस्तुए इस्तेमाल करे ...
उपरांत लोगो के बहाने सुनिए
"एक के करने से क्या होगा ?"..."देश नहीं बदलने वाला "..."रहने भी दो " आदि किन्तु  मान्यवर गिनती की शुरुआत भी एक से ही होती है  ,  लक्ष्य देश बदलना का मत रखो ...संकल्प ले अपने आप को सुधारना का |
 चार लोगो के सामने स्वयं के हाथ से गिरा हुआ कचरा  उठा कर तो कचरापेटी  में डालने जितना साहसी तो  बने |  संकल्प  पूरा करने के लिए यथा संभव प्रयास करो लक्ष्य अपने आप प्राप्त हो  जायेगा | अगर आप स्वयं नहीं बदलना चाहेंगे तो कोई कितना भी बड़ा महा पुरुष ,देवात्मा कोई भी आपकी परिस्थिति नहीं बदल सकता |

जिस  देश में बार बार जन्म लेने की संस्कृति हो उस देश में लोग इतने स्वार्थी , कायर कैसे हो गए
की देश के बारे में सोचने का सहस भी  नहीं करपाते | 
आप के घर में गन्दगी है तो सरकार का समय ना देखे ...ये ना सोचे की मेरे  मित्र ,परिवार आदि  क्या कहेगा |
जब  उनके लाख कहने से आप अपनी बुरी आदते नहीं छोड़ते तो अच्छी आदते कदापि ना छोड़े  |
आप  स्वयं को तो आत्मसुख  मिलेगा ही एवं आपसे छोटे ,बड़ों को प्रेरणा |
स्मरण रखे अपने घर में आप किसी भी धर्म का पालन करे ,घर से बाहर आप केवल भारतीय है |

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा लिखते हो , लगे रहो

    रविन्द्र

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